Mercury planet in Hindi

by | May 3, 2022 | Geography | 0 comments

मरकरी ग्रह को टिमोचारिस नाम की ग्रीक खगोल विद ने पहली बार 200 ईसापुर्व में दर्ज किया था । उस समय मरकरी को तारा माना जाता था और यह भी माना जाता था कि मरकरी ग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करता है , लेकिन 1543 में गणितज्ञ व खगोल विद कॉपरनिकस ने अपने सौरमंडल का मॉडल हमारे सामने रखा जिसमें सूर्य सौरमंडल के मध्य में था और मरकरी व पृथ्वी समेत कई अन्य ग्रह उसकी परिक्रमा कर रहे थे।

बाद में की इटालियन भोतिक वैज्ञानिक गैलीलियो ने अपनी दूरबीन की मदद से ग्रहों को देखकर कॉपरनिकस के मॉडल की सटीकता की पुष्टि की । मरकरी ग्रह को ठीक तरह से बीसवीं सदी के मध्य तक नहीं लिखा गया था ,  लेकिन फिर 1960 के दशक में खगोल वैज्ञानिक ने रेडियो सिग्नल की मदद से मर्करी के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करी और पता चला कि मर्करी का 1 दिन पृथ्वी के 59 दिनों के बराबर में होता है । यह ग्रह सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में पृथ्वी के 88 दिनों का वक्त लेता है , यानी कि इस ग्रह का 1 साल 88 दिनों के बराबर है जो सौर मंडल में सभी ग्रहों में से सबसे कम समय है।

मरकरी गृह पृथ्वी की तरह ही एक टेरेस्टियल चट्टानी ग्रह है। मरकरी ग्रह का औसत व्यास यानी की एवरेज डायमीटर 4880 किलोमीटर है। यह गृह सौर मंडल के कई ग्रहों के कई चंद्रमा से भी बेहद छोटा है या ग्रह 70% मेटल से बना है और 30% सिलीकेट से बना है।

मरकरी ग्रह की सतह का घनत्व यानिकी डेंसिटी जो कि 5.4 ग्राम प्रति सेंटीमीटर क्यूब है । वह सौरमाला के सभी ग्रहों में पृथ्वी को छोड़कर सबसे ज्यादा है। भूवैज्ञानिक यानि के जीयोलॉजिस का मानना है कि मरकरी ग्रह की सतह पृथ्वी के चांद से बेहद मिलती-जुलती है ।चांद की तरह ही इस गृह पर भी प्राचीन काल में हुए शुदृ ग्रहों व धूमकेतू के टकराने से बने हुए ग्रेटर आज की दिखाई पड़ते हैं ।मरकरी गृह का सबसे बड़ा ग्रेटर कैलाश ग्रेटर है, जिसका व्यास लगभग 1550 किलोमीटर है। भूवैज्ञानिक यह मानते हैं कि यह क्रेटर जिस  प्रभाव से बना होगा वह बेहद शक्तिशाली रहा होगा क्योंकि इस ग्रेटर के चारों तरफ 2 किलोमीटर ऊँची जमे हुए लावा की दीवार बनी हुई है।

मरकरी गृह का  तापमान असामान्य रूप से बढ़ता हुआ घटना रहता है। दिन के समय मरकरी का तापमान 430 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाता है, वही रात के समय मरकरी का तापमान -170 डिग्री सेल्सियस तक भी जाना जाता है ।

 इस ग्राह का कोई भी  ज्ञात प्राकृतिक उपग्रह यानी कि नेचुरल सैटेलाइट मौजूद नहीं है।मरकरी  ग्रह को आज तक दो अंतरिक्ष यान भेजे जा चुके हैं , पहला मैरिनर 10 ,जिसने 1974 व 1975 के बीच तीन बार किस ग्रह की परिक्रमा की थी और दूसरा मैसेंजर अंतरिक्ष यान जिसे 2004 में लांच किया गया था उसने मरकरी ग्रह की परिक्रमा 2011 से लेकर 2015 के बीच कई बार की और आखिर में अप्रैल 30 , 2015 को उसे मरकरी ग्रह की सतह पर घटना ग्रस्त कर दिया गया। 

मरकरी ग्रह को सूर्य उदय से ठीक पहले व सूर्यास्त के ठीक बाद आकाश में नंगी आंखों से देखा जा सकता है , इसलिए इसे मॉर्निंग व इवनिंग स्टार के नाम से भी जाना जाता है। मरकरी  ग्रह सूर्य से टाइट लॉक है, इसका मतलब यह है कि मरकरी ग्रह की एक ओर की सतह हमेशा ही सूर्य की एक तरफ होती है और दूसरी तरफ की सतह  हमेशा ही सूर्य के विपरीत होती है बिलकुल वैसे ही जैसे पृथ्वी चंद्रमा का संबंध है । 

इस ग्रह से सूर्य  से औसतन दूरी 5 करोड़ 76 लाख किलोमीटर है । यह  ग्रह पृथ्वी के मुकाबले 26 गुना ज्यादा छोटा है ।वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पृथ्वी से इतने ज्यादा छोटे होने के बावजूद इसका इतना ज्यादा घनत्व इस ओर इशारा करता है, कि इसका कोर  भी पृथ्वी की तरह ही लोहे व निकल से बना हुआ है।

मरकरी ग्रह सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है और साथ ही साथ सूर्य से सबसे नजदीक भी है । मरकरी ग्रह औसतन  पृथ्वी से सात करोड़ 70 लाख किलोमीटर दूर है । मरकरी ग्रह का नाम रोमन देवता मरकरी के नाम पर रखा गया है, जो रोमन देवताओं के दूत व संदेशवाहक बताए जाते हैं। 

मरकरी ग्रह के पौराणिक कथाओं में वर्णन के बारे में तो दोस्तों हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार मरकरी ग्रह को बुध्, सौम्या रहोणी के नाम से भी जाना जाता है । हिंदू पौराणिक कथाओं में बुध् को सोम व तारा का पुत्र माना गया है, वहीं रोमानिक कथाओं में मर्करी को हरमींस का नाम दिया गया है। रोमांनिक गिक मिथको के अनुसार मरकरी को माया व जूपिटल का पुत्र माना गया है ।