Wednesday, January 19, 2022
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Story of earth in Hindi – पृथ्वी कैसे बनी

Story of earth in Hindi – आज कितने आधुनिक बन चुके हैं हम धरती के बाहर जा सकते हैं अंतरिक्ष में करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर तक देख सकते हैं हमारे पास विज्ञान है जो हमें हमारे प्रश्नों के उत्तर देता है वैज्ञानिक डाटा के जरिए हमने हमारे अस्तित्व का भी काफी हद तक सही सही अनुमान लगाया है। 

How earth was born पृथ्वी कैसे बनी

 पृथ्वी जो हमारा घर है जहां हम मनुष्यों ने कई पीढ़ियां बितायी है जिसने कई करोड़ सालों से जीवन को अपने अंदर आश्रय दिया है और आज भी देता आ रहा है वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर जीवो के करीब 87 लाख  प्रजातियां रहती है लेकिन आखिरकार यह सारे जानवर कहां से थे आखिर धरती पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई थी इसके लिए समय में पीछे जाना होगा उस समय पर जब धरती अपनी शुरुआती अवस्था में थी। 

History of Earth in Hindi

पृथ्वी 4.5 अरब  साल पीछे 

करीब 4:30 साल पहले चट्टान का एक बहुत ही विशाल सा गोला एक बेनाम तारे का चक्कर लगा रहा था इसका सतह पिघले हुए लावा से बना था और इस पर जीवन का नामोनिशान तक नहीं था इस वक्त पृथ्वी पर लगातार आसमान से छोटे-छोटे चट्टानों की बरसात हो रही थी काफी लंबे समय तक यह प्रक्रिया चलती रही इसके बाद चट्टान के इस विशाल से गोले ने एक ग्रह  का रूप ले लिया साथ ही इस ग्रह का अपना चांद भी बना। 

 यह वही ग्रह है जहां हम सब रहते हैं इस वक्त पर पृथ्वी का तापमान बहुत ही अधिक था काफी लंबे समय बाद हमारे ग्रह का तापमान थोड़ा सा ठंडा हुआ इस पर ठोस सतह का निर्माण हुआ 

पृथ्वी 3.9 अरब साल पहले – THE LATE HEAVY BOMBARDMENT

इसने फिर से आग के गोलों  की बारिश का सामना किया जिसे हम कहते हैं THE LATE HEAVY BOMBARDMENT और इस वक्त धरती पर केवल छोटे चट्टान ही नहीं बल्कि इसके साथ-साथ उल्का पिंडों की भी बारिश हो रही थी, प्रतिदिन कई हजारों की संख्या में उल्का पिंड धरती पर बरस रहे थे। 

THE LATE HEAVY BOMBARDMENT
Source – Wikipedia

 यह उल्कापिंड अपने साथ कुछ बहुत ही खास लेकर आए थे इनके अंदर जमी बर्फ के क्रिस्टल थी जिसने हमारी धरती पर समुद्रों का निर्माण किया और साथ ही धरती के वातावरण में नाइट्रोजन गैस भी लेकर आये,  पर धरती अपनी भी बेजान थी  यहां जीवन के लिए परिस्थितियां अभी भी उपयोग नहीं बनी थी।  यह अभी पूरी तरह से जहरीली गैस से भरा हुआ था और  वायुमंडल में ऑक्सीजन था ही नहीं। 

 और धरती पर चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ था पर अब यहां परिस्थितियां बदलने वाली थी

  पृथ्वी 3.8 अरब साल पहले 

हमारी तरफ ही में एक बार फिर से उल्का पिंडों की बारिश शुरु हुई पर अबकी बार यह पिंड अपने साथ केवल पानी ही नहीं लाए थे बल्कि यह कुछ बेहद अनमोल चीज लेकर आए थे। जो धरती की जीवन देने वाला था। 

 यह पिंड अपने साथ खनिज लेकर आए थे साथ ही उन्होंने कार्बन, प्रोटीन और एमिनो एसिड्स का भी अंतरिक्ष से समुद्र की गहराइयों तक परिवहन किया परंतु यहां समुद्र की गहराई में तापमान बहुत ही कम था यहां सूरज की रोशनी पहुंची नहीं सकती थी, यहां समुद्र की गहराई में भी छोटे-छोटे प्राकृतिक चिमनी थे जो पानी को गहराई में भी गर्म रख रहे थे और यही पर जीवन का पहला बीज पनपा। 

 हम यह नहीं जानते हैं कि ऐसा कैसे हुआ था लेकिन किसी प्रकार से यहीं पर उन सारे मिनरल्स और केमिकल्स ने आपस में अभिक्रिया करके जीवन का बीज बोया और यहां जन्म हुआ पहले एक कोशिकीय जीव का।  ये  एक प्रकार के बैक्टीरिया थे यह बैक्टीरिया समुद्र में बहुत ही तेजी से बढ़ने लगे अब यह पानी पूरी तरह से इन कोशिकीय जीवो  से भर गया था। 

पृथ्वी 3.5 अरब साल पहले – STROMATOLITES

समुद्र के अंदर इन बैक्टीरिया ओं की संख्या इतनी बढ़ गई थी कि यह आपस में जुड़ कर इस प्रकार के पथरो  जैसे संरचनाओं में बदल गए थे जिसे कहा जाता है STROMATOLITES । 

STROMATOLITES
Source BBC

 यह एक एक चट्टान अपने आप में बैक्टीरिया की एक पूरी बस्ती थी यह बैक्टीरिया सूरज की रोशनी को भोजन में बदलते थे और इस प्रक्रिया को हम बेहतर रूप से जानते हैं – प्रकाश संश्लेषण के नाम से।  इसी प्रक्रिया में यह एक बायप्रोडक्ट को निकालते थे – ऑक्सीजन।  इन्होने  सबसे अनमोल चीज का निर्माण किया जो की जीवन  के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण था। 

 और वास्तव में इसके बिना धरती पर कोई जीव जीवित नहीं रह पाता करीब दो अरब सालों तक पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार बढ़ती रही। 

पृथ्वी 1.5  अरब साल पहले – RODINIA

 धरती में अभी किसी प्रकार का कॉन्प्लेक्स लाइफ  विकसित नहीं हुआ था और ना ही धरती पर इतने बड़े-बड़े महाद्वीप थे। धरती पर केवल छोटे छोटे द्वीप थे जो चारों तरफ से पानी से गिरे थे।  लेकिन फिर पृथ्वी की क्रस्ट में हलचल होने लगी।  इससे धरती की सतह कई सारे टेक्टोनिक प्लेट्स में टूट गई के कारण यह सारे छोटे-छोटे द्वीप  भी आपस में जुड़ गए और बड़े कॉन्टिनेंट का निर्माण किया। 

RODINIA
Source – Carnegiescience

 इसका नाम था RODINIA  इस वक्त पृथ्वी का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस था और धरती का 1 दिन  18 घंटों का था मगर अब समय के साथ यहां परिस्थितियां बदलने वाली थी। 

पृथ्वी 75 करोड़ साल पहले – ICEAGE

धरती का सुपरकॉन्टिनेंट अब दो भागों में टूट गया और धरती के नीचे का लावा ज्वालामुखी विस्फोट के साथ धरती की सतह पर निकलने लगा इन विस्फोट के कारण धरती में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा काफी बढ़ गई अब धरती का आसमान कार्बन डाइऑक्साइड के घने बादलों से घिर गया था।  इन बदलो से  बादलों से लगातार अम्लीय  वर्षा होने लगे धरती के वातावरण का अधिकतर कार्बन चट्टानों  के रूप में जम गया। 

 इससे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में भारी कमी हो गई और अब धरती का वायुमंडल सूरज की गर्मी को रोकने के काबिल नहीं रह सका इस से धरती का तापमान  बहुत ही तेजी से कम होने लगा और धरती पर पहले हिमयुग यानि Ice age  की शुरुवात हुई। 

 अब तक का सबसे लंबा हिमयुग था।  लेकिन यह भी हमेशा के लिए नहीं रहने वाला था समय के साथ-साथ वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा फिर से पड़ने लगी है और पृथ्वी का तापमान फिर से बढ़ने  लगा इससे धरती पर जमा हुआ पानी  फिरसे पिघलने  लगा और पृथ्वी फिर से सामान्य रूप में आने लगी। 

 लेकिन सिंगल सेल बैक्टीरिआ का क्या हुआ जो आईसिस के आने से पहले समुद्र में था। 

पृथ्वी 54 करोड़ साल पहले  – Anomalocarids

इस वक्त समुद्र के अंदर जाने पर हमें एक बिल्कुल नई दुनिया देखने को मिलती है ऑक्सीजन की उपयोगिता में एक कोशिकीय जीव कई अन्य रूपों में विकसित हो चुके थे ऐसी अजीब सी छोटे-छोटे समुद्री जीव के साथ ही एक दैत्य भी था – Anomalocarids 

Anomalocarids
Source – Wired

 यह सब कंपलेक्स मल्टीसेल्यूलर ऑर्गेनाइज्म की नई प्रजाति थे जो कि एक एक कोशिकीय सूक्ष्मजीव से विकसित हुए थे

 PIKAYA  – ये केवल 5 सेंटीमीटर लंबे थे लेकिन उन्होंने अपने शरीर में कुछ भी अधिक खास विकसित कर लिया था जो आगे चलकर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग बनने वाला था यह पहले जीव थे जिनके पास रीढ़ की हड्डी थी।  विकसित होकर यह खासियत हमें भी मिलने वाली थी। 

 पृथ्वी 46 करोड़ साल पहले – TETRAPODS

अब स्थिति कुछ हद तक जानी पहचानी हो गई थी।  कॉन्टिनेंट अब और भी कई भागों में टूट गया था लेकिन अभी भी जमीन पर रहने वाले जीव नहीं आए थे और जमीं पर पेड़ पौधे पर नहीं  थे दरअसल ऐसा सूरज  से आने वाली हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों की वजह से हो रहा था। 

पर ऐसा क्यों था। दरअसल ऐसा सूरज से आने वाली ultravoilet किरणों की वजह से हो रहा था पर अब धरती के वायुमंडल में एक नए परत का निर्माण हो रहा था। जिसे हम कहते हैं ओजोन लेयर। वायुमंडल की ऑक्सीजन सूरज के अल्ट्रावॉयलेट किरणों को सोख कर ओजोन गैस में बदलने लगे थे जिसने धरती के चारों ओर एक चादर का निर्माण किया। जो आज भी हमे सूरज से बचती है।

इसी कारण धरती की सतह पर नन्हे सेहवाल फल फूल सके और ये ही धरती के पहले लैंड एनिमल्स बने। समुद्र में रहने वाली यह मछली जिसने पहली बार समुंदर से बहार आने का निर्णय लिया इसने अपने फिन्स का इस्तेमाल पैरों के रूप में किया और समय के साथ यह जमीन पर ज्यादा देर तक रहने लगा जिससे इसके अंग काफी विकसित हो गए .

करीब 1 .5 करोड़ के विकास क्रम के बाद यह जानवर जमीन में रहने लायक बन चुके थे। और इन्हे कहा जाता था – TETRAPODS 

TETRAPODS
Source – Wikipedia

आज से करीब 36 वर्ष पहले यह टेट्रापोड्स पूरी तरह से विकसित हो गए थे और अब यह पूरी तरह जमीन पर रहने वाले जीव बन गए। ये ही वो जानवर थे जो आगे चलकर डायनासोर वर्ल्ड मेमल और अंत में इंसानों में विकसित होने वाले थे।

यहां से एक नए प्रजाति की शुरुआत हुई लेकिन अब धरती का बुरा वक्त आने वाला था।

समय के साथ जीवों की विकास प्रक्रिया जारी रही लेकिन साथ ही धरती का वातावरण भी बहुत तेजी से बदल रहा था एक बार फिर से ज्वालामुखी विस्फोट के कारण धरती  का तापमान बहुत ही बढ़ गया जिसे धरती पर बहुत बड़ा अकाल पड़ गया। इस अकाल में लगभग सारे पेड़ सूख गए हैं और धरती पर जीवो की कुल 95% आबादी साफ हो गई।

इस समय में कुछ भी जिंदा बच पाए जिन्होंने जिंदा रहने के लिए कुछ भी खाना शुरू कर दिया और बचने के लिए जमीन के अंदर रहने लगे। समय के के साथ-साथ विशेष परिस्थितियों में सुधार आया।

पृथ्वी 20 करोड़ साल पहले – PANGEA 

पहले पृथ्वी की रूपरेखा काफी हद तक बदल गई थी ज्वालामुखी विस्फोट से नए भागों का निर्माण हुआ जिन्होंने आपस में मिलकर एक सुपरकॉन्टिनेंट का निर्माण किया – PANGEA 

PANGEA
Source – Wikipedia

अब पृथ्वी अंतरिक्ष से काफी हद तक आज की कैसी दिखाई देती थी फिर से नए पेड़ पौधे उगने  लगे और जो 5% जीव् बचे थे वह पूरी तरह से विकसित हो चुके थे।

अब एक बिल्कुल नहीं प्रजाति का जन्म हुआ था जो आने वाले समय में धरती पर अपना शासन चलाने वाला था – डायनासोर। डायनासोर उन  5% रेंगने वाले जीवों से विकसित हुए थे जो खुद को किसी प्रकार से बचा पाए थे।

डायनासोर की भी कई प्रजातियां थी, कुछ शाकाहारी थी तो कुछ मांसाहारी। कुछ शांत स्वभाव के थे तो कुछ बहुत ही हिंसक। डायनासोर ने भी काफी लंबे समय तक धरती पर राज किया।

करीब 11 करोड़ साल तक यह धरती पर पल-पल रहे थे और इसके बाद क्या हुआ ?

अगर आप इस से आगे की कहानी भी जान ना चाहते है तो निचे कमेंट कर के बताये।

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